इल्मे दीन की फ़ज़ीलत
इल्मे दीन गुनाहों का कफ़्फ़ारा
हज़रते संजरा रदीअल्लाहु अन्हु बयान करते है कि ताजदारे मदीना सललल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया है कि “जो बन्दा इल्मे दीन हासिल करता है तो यह इल्म हासिल करना उसके पिछले गुनाहों का कफ़्फ़ारा है। “(तिबरानी)
इल्मे दीन से मुश्किल आसानः
फ़रमाने मुस्तफ़ा है : जो इल्मे दीन हासिल करेगा अल्लाह उस की मुश्किलात को आसान फ़रमा देगा। (इहया उल उलूम, जिल्द 1)
इल्म के ज़रिए बख्शिशः
फरमाने मुस्तफ़ाﷺ है “अल्लाह कियामत के दिन इबादत गुज़ारों को उठाएगा फिर औलमा को उठाएगा और उन से फरमाएगा ऐ औलमा के गिरौह! मैं तुम्हें जानता हूं इसी लिये तुम्हें अपनी तरफ से इल्म अता किया था और तुम्हें इस लिये इल्म नहीं दिया था कि तुम्हें अजाब में मुब्तला करूंगा। जाओ ! मैं ने तुम्हें बख्श दिया” । (इहया उल उलूम, जिल्द 1, पेज 48)
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