इंसान बेकार नहीं बनाया गया
अल्लाह फरमाता है (तर्जमा) : क्या यह समझते हो कि हमने तुम्हें बेकार बनाया और तुम्हें हमारी तरफ़ फिरना नहीं (सुरहः मोमिनून, आयत 115)
जानना चाहिए कि अल्लाह इंसानों को बनाया तो उस पर 2 किस्म़ के जिम्मेदारियां रखी।1. हुकूकु़ल्लाह और 2. हुक़ुकूल इबाद और इन दोनो हुकू़क़ का अदायगी को अल्लाह की इबादत कहा जाता है। तमाम हुकू़क़ की अदायगी 2 तरिको से है मोहब्बत या नफ़रत यानी किसके साथ क्या करना है और क्या नहीं करना है। तमाम हक़ वालों से महब्बत, इताअत, निस्बत, खि़दमत, इज्ज़त व ताज़िम का मामला रखना चाहिए और तमाम बातिल से नफ़रत, मुखालफल, अदावत, परहेज़ और दूरी का मामला रखना चाहिए।
लिहाजा इंसानों को अपना तखलीक़ का असल मक़सद नहीं भूलना चाहिए और बेकार नियत, बेकार कामो, बेकार बातों में अपना कीमती वक़्त बर्बाद नहीं करना चाहिए । जो काम अल्लाह के फरमान के खि़लाफ़ है वो तमाम काम बेकार और गुनाह है इससे हर हाल में बचना चाहिए क्योंकि ये बेकार और गुनाह वाले काम इंसान और रहमान के दरमियान हिजाब (रूकावट) है और इंसानों के असल मक़सद का हुसूल यानी , अल्लाह का क़ुर्ब, अल्लाह की पहचान और अल्लाह की रज़ा से महरूमी का सबब है।
इन्सानों को आजाद नहीं छोड़ा जाएगा
अल्लाह फ़रमाता : क्या आदमी इस घमण्ड में है कि आज़ाद छोड़ दिया जाएगा। (सूरह कियामह, आयत न 36)




