दीनदार लोगों की ज़रूरत है
यही लोग मुराद को पहुंचे।
अल्लाह फ़रमाता है : (तर्जमा) तुम में एक गिरोह (Team) ऐसा होनी चाहिए की भलाई की तरफ़ बुलाएं और अच्छे काम करने का हुक्म दे और बुरे कामों से रोके । यही लोग मुराद को पहुंचे।
(कंजूल ईमान, सूरह -अंकबूत, आयत नं. 6)
दीन का ख़िदमत क्यों करे?
अल्लाह फ़रमाता है : (तर्जमा) ऐ ईमान वालो अगर तुम ख़ुदा के दीन की मदद करोगे अल्लाह तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारे क़दम जमा देगा।
(कंजूल ईमान, सूरह – मुहम्मद, आयत न. 7)
अल्लाह की राह में कोशिश
अल्लाह फ़रमाता है : (तर्जमा) जो अल्लाह की राह में कोशिश करे तो अपने ही भले को कोशिश करता है बेशक अल्लाह बेपरवाह है सारे जहान से।
(कंजूल ईमान, सूरह -अंकबूत, आयत नं. 6)