Zakat

जका़त तहसीलने का हुक़्म
अल्लाह फ़रमाता है (तर्जमा) : ऐ महबूब उनके माल में से जका़त तहसील करो जिससे तुम और भी उन्हें सुथरा और पाकीज़ा कर दो उनके हक़ में दुआए खैर करो बेशक तुम्हारी दुआ उनके दिलों का चैन है और अल्लाह सुनता जानता है। (कंजूल ईमान, सूरह तौबा, आयत न. 103)

ज़कात से हिदायत और परहेज़गारी का हुसुल
क़ुरआन में है (तर्जमा) : हिदायतयाफ्ता और परहेज़गार वो है जो हमारी दी हुई रोज़ी में से हमारी राह में उठाएं (खर्च करे)। (कंजूल ईमान, सूरह बक़रह, आयत नं. 2,3)

कामयाबी ज़कात की अदायगी में
क़ुरआन में है (तर्जमा) : कामयाब होते है वो जो ज़कात अदा करते है। (कंजूल ईमान, सूरह मोमीनून, आयत नं. 4)

ज़ाक़त देने वाले को न कुछ डर न कुछ ग़म
क़ुरआन में है (तर्जमा) : वो जो अपने माल अल्लाह की राह में ख़र्च करते है फिर दिये पीछे न एहसान रखें न तकलीफ़ दें उनका नेग उनके रब के पास है और उन्हें न कुछ डर हो न कुछ ग़म। (कंजूल ईमान, सूरह बक़रह, आयत नं. 262)

ज़कात देने वालो को दो गुना अजर
क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है (तर्जमा) : उनको उनका अजर दो गुना दिया जाएगा बदला उनके सब्र का और वो भलाई से बुराई को टालते हैं और हमारे दिये से कुछ (2.5%) हमारी राह में ख़र्च करते हैं। (कंजूल ईमान, सूरह क़सस, आयत नं. 54)

ज़कात अदा किए बगैर भलाई हासिल नहीं कर सकते
क़ुरआन में है (तर्जमा) : तुम हरगिज़ भलाई को न पहुंचोगे जब तक राहे खुदा में अपनी प्यारी चीज़ ख़र्च न करो और तुम जो कुछ ख़र्च करो अल्लाह को मालूम है। (कंजूल ईमान, सूरह इमरान, आयत नं. 92)

ज़कात देना असल नेकी और परहेज़गारी है
क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है (तर्जमा) : कुछ अस्ल नेकी यह नहीं कि मुंह मश्रिक़ (पूर्व) या मग़रिब (पश्चिम) की तरफ़ करो हाँ अस्ल नेकी ये कि ईमान लाए अल्लाह और क़यामत और फ़रिश्तों और किताब और पैग़म्बर पर और अल्लाह की महब्बत में अपना अज़ीज़ माल दे रिश्तेदारों और यतीमों और मिस्कीनों और राहगीर और सायलों (याचकों) को और गर्दन छुड़ाने में और नमाज़ क़ायम रखे और ज़कात दे, और अपना क़ौल पूरा करने वाले जब अहद करें,और सब्र वाले मुसीबत और सख़्ती में और जिहाद के वक़्त, यही हैं जिन्होंने अपनी बात सच्ची की, और यही परहेज़गार हैं। (कंजूल ईमान, सूरह बक़रह, आयत नं. 177)

ज़कात न देने वालो के लिए दर्दनाक अज़ाब
क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है (तर्जमा) : वो जो जोड़ कर रखते हैं सोना और चांदी और उसे अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते उन्हें ख़ुशख़बरी सुनाओ दर्दनाक अज़ाब की, जिस दिन वह तपाया जाएगा जहन्नम की आग में फिर उससे दाग़ेंगे उनकी पेशानियाँ और कर्वटें और पीठें यह है वह जो तुमने अपने लिये जोड़ कर रखा था अब चखो मज़ा उस जोड़ने का।
(कंजूल ईमान, सूरह तौबा, आयत नं. 34- 35)

वो माल अच्छा नही बल्कि बुरा है
क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है (तर्जमा) :
जो बुख़्ल (कंजूसी) करते हैं उस चीज़ में जो अल्लाह ने उन्हें अपने फ़ज़्ल से दी हरगिज़ उसे अपने लिये अच्छा न समझें बल्कि वह उनके लिये बुरा है अन्करिब वह जिसमें बुख़्ल किया था क़यामत के दिन उनके गले का तौक़ होगा और अल्लाह ही वारिस है आसमानों और ज़मीन का और अल्लाह तुम्हारे कामों से ख़बरदार है।(कंजूल ईमान, सूरह इमरान, आयत नं. 180)

माल जमा करने वालो का अंजाम
क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है (तर्जमा) : जिसने माल जोड़ा और गिन गिन कर रखा, क्या वह समझता है कि उसका माल उसे दुनिया में हमेशा रखेगा हरगिज़ नहीं ज़रूर वह रौंदने वाली में फ़ैका जाएगा और तूने क्या जाना क्या रौंदने वाली अल्लाह की आग के भड़क रही है वह जो दिलों पर चढ़ जाएगी बेशक वह उनपर बन्द कर दी जाएगी लम्बे लम्बे सुतूनों में।(कंजूल ईमान, सूरह हुमाज़ह, आयत नं. 2-9)

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