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Iman Ki Hifazat

ईमान की हिफाज़त

क़ुरआन में है: (तर्जुमा) “तो क्या वह जिसका सीना अल्लाह ने इस्लाम के लिये खोल दिया तो वह अपने रब की तरफ़ से नूर पर है,“ (सूरह ज़ुमर, आयत न. 22)

शाने नुज़ूल: रसूले करीम ﷺ ने जब यह आयत तिलावत फ़रमाई तो सहाबा ने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह, सीने का ख़ुलना किस तरह होता है फ़रमाया कि जब नूर दिल में दाखि़ल होता है तो व खुलता है और उसमें फैलावा होता है. सहाबा ने अर्ज़ किया इसकी निशानी क्या है. फ़रमाया, ’इस फ़ानी दुनिया से कनाराकशी, आखि़रत की तरफ़ रुजू, मौत आने से पहले मौत की तैयारी“ (खजाइनुल ईरफ़ान)

ईमान पर खा़त्मा
अल्लाह त‘आला की नेयमतों में सब से बड़ी नेमत ईमान की दौलत है। इसकी हिफ़ाज़त हर मुसलमान को महबूब फ़र्ज़ होना चाहिए। बाज़ अकाबिर औलियाए कराम से मंकूल है के जो शख़्स मगरिब के बाद की दो सुन्नतों में से पहली रकअत में सूरह फातिहा के बाद सूरह फलक और दूसरी रक-अत में सूरह फातिहा के बाद सूरअ नास हमेशा पढा करे तो इस का ईमान भी महफ़ूज़ रहेगा और ख़तमा ईमान पर होगा।
हज़रत इमाम अबू हनीफ़ा रहमतुल्लाह अलैह ने फरमाया के जो शख़्स ईमान की दौलत मुयस्सर आने पर हमेशा ख़ुदाय-ए ताला का शुक्रिया अदा करता रहेगा, इस का ईमान भी महफ़ूज़ रहेगा और ख़ात्मा ईमान पर होगा। बल्कि खुदा-ए -त‘आला के वादा के मुताबिक के: (तर्जुमा) के अगर तुम हमारी नेमतों का शुक्र अदा करो तो हम उन नेमतों में इज़ाफ़ा कर देंगे।
ख़ुदाय-ए त‘आला के इस वादे के मुताबिक ईमान में क़ुव्वत और ईमानी कामों में बरकत होगी इंशा अल्लाह (गंजिनाए असरार, पेज न. 16)

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