Kanjul Iman (H+U+R)
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ईमान की 60 या 70 से ज़्यादा शाखेंः
हज़रते अबू हुरैरह रदीअल्लाहु त’आला अन्हु नबी अलैहिस्सलाम से रिवायत करते हैं कि आप ﷺ इरशाद फरमाते हैं ईमान की साठ या 70 से ज़्यादा शाखें हैं और इनकी सबसे आ’ला जड़ और बुनियाद ला इलाहा इल्लल्लाह पर यकीन रखना है और सबसे अदना ईमान तकलीफ देह चीज़ का रास्ते से हटा देना और हया ईमान की एक शाख है। (शुअबुल ईमान जिल्द 1)
ईमान की ताकत सबसे बढ़ कर
अल्लाह फ़रमाता है : न सुस्ती करो और न ग़म खाओ तुम्ही ग़ालिब आओगे अगर ईमान रखते हो (कन्जुल ईमान, सूरह इमरान, आयत न 139)
तख़्लीक़े ईमान व कुफ्र
हदीस : जब अल्लाह त’आला ने ईमान को पैदा फ़रमाया तो उसने अर्ज की ऐ अल्लाह! मुझे कुव्वत अता फ़रमा, तो अल्लाह त’आला ने उसे हुस्ने खुल्क और सखावत से तक़वियत बख़्शी और जब अल्लाह तआला ने कुफ्र को पैदा फ़रमाया तो उसने अर्ज़ की ऐ अल्लाह मुझे कुव्वत बख़्श तो उसने उसे बुख़्ल (कंजूसी) और बद-खुल्की से तवियत बख़्शी।(मुकाशफतुल क़ुलूब, बाब न. 85, पेज न. 481)
ईमान की अलामत
हज़रते अबू सईद से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ने फ़रमाया कि दो खस्लतें मोमिन में जम्अ नहीं होगी, बखीली और बद अख़्लाकी । (सुनन तिर्मिज़ी )
मतलब येह है कि जो मोमिन होगा अगर बखील होगा तो बद अख्लाक नहीं होगा और अगर बद अख़लाक़ होगा तो बखील नहीं होगा येह दोनों बुरी खस्लतें एक साथ मोमिन में नहीं पाई जाएंगी। (जहन्नम के ख़तरात, पेज 164)
बुख़्ल की हलाक़ते
हज़रते इब्ने अम्र से रिवायत है कि इस उम्मत इब्तिदाई दौर के लोग यकीन और ज़ोहद की वजह से नजात पा गए और आख़िरी दौर के लोग बखीली (कंजूसी) और हिर्स की वजह से हलाक़ होंगे। (कंजुल उम्माल, ज़िल्द 3, हदीस 141)