मोमिनों को मदद करने का हुक़्म
फ़रमाने इलाही है- (तर्जुमा) नेकी और परहेज़गारी पर एक दूसरे की मदद करो और गुनाह और ज़ियादती पर आपस में मदद न दो और अल्लाह से डरते रहो, बेशक अल्लाह का अज़ाब सख़्त है। (कंजुल ईमान, सूरह माएदा, आयत नं. 2)
मोमिनों पर मोमिनों का 4 हुक़ूक
हज़रते मालिक बिन अनस रज़ियल्लाहु से मरवी है, हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया तुम पर मोमिनों के चार हुकूक हैं- 1 अपने ऐहसान करने वालों की इमदाद करो, 2 गुनहगारों के लिए मग़फिरत तलब करो, 3 मरीज़ की अयादत करो और 4 तौबा करने वाले को दोस्त रखो।(मुकाशफतुल क़ुलूब, बाब 18, पेज 130)
यतीमों और मिस्कीनों का मदद करो
एक शख्स ने दरबारे रिसालत में येह शिकायत की, कि मेरा दिल सख़्त है तो हुजूर ने फ़रमाया कि तुम यतीम के सर पर हाथ फैरो और मिस्कीन को खाना खिलाओ। (मिश्क़त ज़िल्द 2 परज 424)
फुकरा से भलाई करो
फ़रमाने नबवी है कि फुकरा को पहचानो और उन से भलाई करो, उन के पास दौलत है। पूछा गया कि हुज़ूर कौन सी दौलत है ? आप ने फरमाया : जब कियामत का दिन होगा, अल्लाह तआला उन से फ़रमाएगा जिस ने तुम्हें खिलाया पिलाया हो या कपड़ा पहनाया हो उस का हाथ पकड़ कर उसे जन्नत में ले जाओ । (मुकाशफुतुल क़ुलूब, बाब 31)
जिहाद के बराबर सवाब
हदीस हुजूर ﷺ ने फरमाया कि जो शख्स किसी भाई की इमदाद और फाइदे के लिए कदम उठाता है, उसे ख़ुदा की राह में जिहाद करने वालों जैसा सवाब मिलता है।
उनके लिए नूर के मेम्बर
हदीस – फ़रमाने नबवी ﷺ है कि अल्लाह तआला ने ऐसी मख़्लूक को पैदा फ़रमाया है जिन का काम लोगों की ज़रूरतों को पूरा करना है और अल्लाह तआला ने अपनी जात की कसम खाई है कि उन्हें अज़ाब नहीं करेगा, जब कियामत का दिन होगा उनके लिए नूर के मेम्बर रखे जायेंगे, वह अल्लाह तआला से गुफ़्तगू कर रहे होंगे हालांकि लोग अभी हिसाब में होंगे।
गुनाहों का कफ़्फ़ारा
हदीस – फ़रमाने नबवी ﷺ है कि जो किसी मुसलमान भाई की हाजत-रवाई के लिए कोशिश करता है चाहे उसकी हाजत पूरी हो या न हो, अल्लाह तआला कोशिश करने वाले के अगले पिछले सब गुनाहों को बख़्श देता है और उसके लिए दो छुटकारे (निज़ात) लिख दिये जाते हैं। जहन्नम से रिहाई और मुनाफ़कत से छुटकारा ।
उसकी शफाअत
हदीस – फ़रमाने नबवी ﷺ है कि जो शख्स किसी मुसलमान भाई की हाजतरवाई करता है, मैं उसके मीज़ान के करीब खड़ा हूंगा, अगर उसकी नेकियां ज़्यादा हुई तो सहीह वरना मैं उसकी शफाअत करूंगा, यह रिवायत हिलया में अबू नईम ने नक़्ल की है।
गुनाहों का कफ़्फ़ारा
हदीस – हज़रते अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है हुजूर ﷺ ने फ़रमाया जो शख्स किसी मुसलमान भाई की हाजत रवाई के लिए चलता है अल्लाह तआला हर कदम के बदले उसके आमाल नामे में सत्तर नेकियां लिख देता है और सत्तर गुनाह माफ कर दिये जाते हैं पस अगर वह हाजत उसके हाथों पूरी हो जाये तो यह गुनाहों से ऐसे पाक हो जाता है जैसे माँ के पेट से आया था और अगर वह उसी दर्मियान मर जाये तो बिला हिसाब जन्नत में जाएगा।
जहन्नम से दूरी
हदीस – हजरते इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि हुजूर ﷺ ने फ़रमाया जो शख्स अपने मुसलमान भाई की हाजत रवाई (जरूरत पूरा करने ) के लिए उसके साथ जाता है और उसकी हाजत पूरी कर देता है तो अल्लाह तआला उसके और जहन्नम के बीच सात खन्दकें बना देता है और दो खन्दकों का दर्मियानी फासिला जमीन व आसमान के दर्मियानी फासिले के बराबर होता है।
मख़सूस इनआमात का हक़दार
हदीस – हज़रते इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मरवी है हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि अल्लाह तआ़ला के कुछ ऐसे इनआमात हैं जो उन लोगों के लिए मख़सूस हैं जो लोगों की हाजत रवाई करते रहते हैं और जब वह यह तरीका छोड़ देते हैं तो अल्लाह तआला वह इनआमात दूसरों की तरफ मुन्तकिल कर देता है।
भलाई करने वाले आमान में
हदीस – हज़रते अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है हुजूर ﷺ ने फरमाया जानते हो कि शेर अपनी दहाड़ में क्या कहता है? सहाबा ने अर्ज किया कि अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते हैं, आपने फ़रमाया वह कहता है कि ऐ अल्लाह! मुझे किसी भलाई करने वाले पर मुसल्लत न करना।
हदीस – भलाई करने वालो के लिए खुशखबरी
हुजू़र सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फ़रमान है, उस शख़्स के लिए खुशखबरी है जिस के हाथों भलाईयों का सदूर होता है और उस शख़्स के लिए हलाकत है जिस के हाथों बुराईयां फ़रोग़ (बढ़ावा) पाती हैं।
रहमतें इलाही का नुज़ूल
हदीस :- हज़रत अबू उमामा बाहिली रदियल्लाहु तआ़ला अन्हु से मरवी है वह कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि बेशक अल्लाह तआ़ला रहमत नाजि़ल फ़रमाता है कि और उसके फ़रिश्ते और आसमानों ज़मीनों वाले यहाँ तक कि चींटियाँ अपने बिल में और मछलियाँ सब दुआऐ रहमत करती हैं। उस के लिए जो लोगों को भलाई की तालीम देता है। (मिश्कात, जिल्द 1, सफा 34)
काबिले रश्क सिर्फ दो ही शख्स हैं
हदीस :- हजरत इब्ने मसऊद रदियल्लाहु तआला अन्हु से रावी हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि काबिले रश्क सिर्फ दो ही शख्स हैं। एक तो वह जिसको अल्लाह तआला ने माल दिया और वह उसको अपने अहलो अयाल पर हक के तौर पर खर्च करता है और दूसरा वह आदमी जिसको अल्लाह तआला ने इल्मे दीन अता फरमाया तो वह उसके मुताबिक फैसला करता है और दूसरों को इल्मे दीन सिखाता है। (मिशकात, जिल्द, 1 सफा, 32)
अल्लाह व रसूल का मुहिब्ब या महबूब कौन ?
हदीस – रसूलुल्लाह ने फ़रमाया कि जिस शख्स को येह बात अच्छी लगती हो कि वोह अल्लाह और उस के रसूल का मुहिब्ब बन जाए या अल्लाह और उस के रसूल का महबूब बन जाए तो उस को चाहिये कि हमेशा सच्ची बात बोले और जब उस को किसी चीज़ का अमीन बना दिया जाए तो वोह उस अमानत को अदा करे और अपने तमाम पड़ोसियों के साथ अच्छा सुलूक करे । (मिश्क़त ज़िल्द 2)
मुसलमानों के उयूब छुपाओ
हदीस – रसूले अकरम ने इरशाद फ़रमाया कि जो शख्स किसी मुसलमान के ऐब को देख ले और फिर इस की पर्दा पोशी करे तो उस को अल्लाह तआ़ला इतना बड़ा सवाब अता फरमाएगा जैसे कि ज़िन्दा दरगोर की बच्ची को कोई क़ब्र से निकाल कर उस की परवरिश और उसकी ज़िन्दगी का सामान कर दे। (मिश्क़त ज़िल्द 2 परज 424)
तब तक कामिल मोमिन न होगा
हज़रत अनस रदि़यल्लाहु तआ़ला अ़न्हु से रिवायत है कि तर्जु़मा :- हुजू़र नबीए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि तुम में से कोई (कामिल) मोमिन नहीं होगा। जब तक कि अपने (मोमिन) भाई के लिए वही चीज़ न पसन्द करे जो अपनी ज़ात के लिए पसन्द करता है।(बुखारी, जिल्द 1, सफा 6 किताबुल ईमान )
(शरह) मसलन हर शख़्स अपनी जात के लिए यह पसन्द करता है कि कोई मुझ को नुक़सान न पहुँचाए. कोई मेरी बे आबरुई न करे कोई मेरे साथ बदसुलूकी न करे। कोई मुझे धोका और फ़रेब न दे कोई मुझको और मेरे रिश्तादारों और मुहब्बत वालों को न सताए यूँ ही हर शख्स अपने लिए यह पसन्द करता है कि मुझे इज्ज़त आबरु, माल व दौलत और तन्दरुस्ती व सलामती मिले मेरी हर चीज़ अच्छी हो मेरी जि़न्दगी अच्छी गुजरे। मुझे | हर तरह का आराम व राहत मिले, वगै़रह वगै़रह । (अब्दुल मुस्तफ़ा आज़मी)
बेहतरीन घर और बदतरीन घर
हदीस – हुजूरे अकरम ने फ़रमाया कि मुसलमानों के घरों में सब से बेहतरीन घर वोह है जिस में कोई यतीम रहता हो और उस के साथ बेहतरीन सुलूक किया जाता हो और मुसलमानों के घरों में से बदतरीन घर वोह है कि उस में कोई यतीम हो और उस के साथ बुरा सुलूक किया जाता हो । (मिश्क़त ज़िल्द 2, पेज 423)
बूढ़ों की ताज़ीम करो
हदीस – रसूलुल्लाह ने फ़रमाया कि जो जवान आदमीकिसी बूढ़े की ताज़ीम उस के बुढ़ापे की बिना पर करेगा तो अल्लाह तआला उसके बुढ़ापे के वक्त कुछ ऐसे लोगों को तय्यार फ़रमा देगा जो बुढ़ापे में उसका एजाज़ व इकराम करेंगे। (मिश्क़त ज़िल्द 2 परज 423)
क़ौल 1- हज़ते अब्दुल्लाह बिन हसन बिन हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुम कहते हैं कि मैं किसी ज़रूरत के लिए हज़रते उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रज़ियल्लाहु अन्हु के पास गया, उन्होंने मुझे कहा जब भी आप को कोई ज़रूरत पेश आये तो मेरी तरफ कोई कासिद भेज दें या ख़त लिख दें क्यों कि मुझे अल्लाह तआला से हया आती है कि आप मेरे दरवाजे पर तशरीफ लायें।
क़ौल 2 – हज़रते अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु का कौल है रब्बे जुलजलाल की कसम ! जो हर आवाज़ को सुनता है, कोई शख़्स ऐसा नहीं है जो अपने दिल में मुसर्रत को जगह देता है मगर अल्लाह तआला उस सुरूर से लुत्फ अता फ़रमाता है, फिर जब कोई मुसीबत नाज़िल होती है तो वह उस खुशी को इस तरह बहा लेजाती है जैसे पानी नशेब में बहता है यहां तक कि उसे अजनबी ऊँट की तरह हंका दिया जाता है, नीज़ आपने फ़रमाया कि ना-हन्जार लोगों से हाजत तलब करने से हाजत का पूरा न होना बेहतर है, आपने मजीद फरमाया, अपने भाई के पास बहुत ज़्यादा ज़रूरते लेकर न जाओ क्योंकि बछड़ा जब थनों को बहुत ज़्यादा चूसने लगता है तो उसकी माँ उसे सींग मारती है।
किसी शायर ने क्या खूब कहा है-
1. जब तक तेरे मकदूर में हो किसी एहसान करने में पशो पेश न कर और यह जिन्दगी गुज़रने वाली है।
2. और अल्लाह तआला की इस नवाज़िश को याद रख कि उसने तुझे लोगों का हाजत रवा बना दिया है मगर तू किसी के पास अपनी हाजत लेकर नहीं जाता।
एक और शायर कहता है-
1. जहां तक तुझसे मुमकिन हो लोगों की ज़रूरतें पूरी कर और उनका हाजत रवा भाई बन ।
2. बेशक किसी जवान का उम्दा दिन वही है जिस में वह लोगों की हाजत रवाई करता है